सीबीआई के इस कदम से बढ़ सकती है बीएसपी मुखिया मायवती की मुश्किल, जानें क्या है मामला

By Pradesh Times Saturday, April 27 19 12:00:00

सीबीआई के इस कदम से बढ़ सकती है बीएसपी मुखिया मायवती की मुश्किल, जानें क्या है मामला

मायावती के शासन काल में सुगर मिलों को बेचे जाने का मामला गरमा गया है। इस संबंध में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है। बीएसपी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है।

 
 

नई दिल्ली: बीएसपी मुखिया मायावती को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।  सीबीआई ने 2010-11 के दौरान राज्य सरकार के स्वामित्व वाले चीनी मिलों के बेचे जाने पर एफआईआर दर्ज की है। सीबीआई ने इस संबंध में 6 प्राथमिक जांच कमेटी का गठन कर कथित अनियमितता की जांच कराने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि तत्कालीन बीएसपी सरकार के फैसले की वजह से राज्य के खजाने को 1,179 करोड़ का नुकसान हुआ था।

इस संबंध में कैग ने 2013 में रिपोर्ट पेश किया था। इस प्राथमिकी में उत्तर प्रदेश सरकार के किसी अधिकारी या राजनेता के नाम का सीधे तौर जिक्र नहीं किया गया है। इस मामले में सात लोगों का नाम एफआईआर में दर्ज है जिन लोगों ने फर्जी कागजात के आधार पर राज्य सरकार के स्वामित्व वाले सुगर मिल को खरीदा। इन लोगों के खिलाफ कंपनी एक्ट की धारा 629ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

इस संबंध में बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव राम अचल राजभर ने कहा कि केंद्र सरकार सीबीआई की दुरुपयोग कर रही है। इसके जरिए विपक्ष के आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि मोदी सरकार की कोशिश कामयाब नहीं होगी। यह पूरा मामला तब सामने आया जब 2013 में कैग की तरफ से रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि सुगर मिलों को औने पौने दाम में बेचा गया। 2018 में योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर सीबीआई जांच की मांग की थी। 

मायावती के कभी खास रहे नसीमुद्दीन सिद्दिकी ने 2017 में कहा था कि मायावती के शासन यानि कि 2007 से 2012 के दौरान राजकीय स्वामित्व वाली सुगर मिलों को मायावती और महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के निर्देश पर बेचा गया था। इसके बाद मायावती और सतीश चंद्र मिश्रा की तरफ से बयान आया कि इस तरह के सौदे के लिए सिर्फ नसीमुद्दीन अकेले जिम्मेदार थे। 

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