हर हफ्ते बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के 28 जज खाते हैं एकसाथ

By Pradesh Times Monday, April 17 17 12:00:00

हर हफ्ते बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के 28 जज खाते हैं एकसाथ

सुप्रीम कोर्ट के जजों को हर हफ्ते बुधवार के लंच ब्रेक का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस दिन उन्हें किसी खास राज्य के लजीज पकवान परोसे जाते हैं। वो भी किसी होटल या रेस्त्रां से नहीं बल्कि घर के बने। इस पूरी कवायद के पीछे एक ही मकसद है कि सुनवाई के दौरान के मतभेद और दूसरे काम के दबाव को भुलाकर आपसी दोस्ती और बढ़ाई जाए। बुधवार को बाकि दिनों से अलग सभी 28 जज एक बजते ही कॉमन डाइनिंग हॉल में पहुंचते हैं और एक साथ स्वादिष्ट भोजन का आनंद उठाते हैं।

 

इस दौरान किसी केस या कानून की बात नहीं होती बल्कि सभी न्यायाधीश लजीज खाने की रेसिपी और मसालों पर चर्चा करते हैं। इस बात का भी ख्याल रखा जाता है कि भोजन पूरी तरह शाकाहारी हो और खाने के लिए सिर्फ पांच पकवान ही परोसे जाएं। खाने के बाद हर जज को उनकी पसंद का पान दिया जाता है। आपको बता दें कि रिटायर्ड जस्टिस कुलदीप सिंह ने नब्बे के दशक में साप्ताहिक लंच का सुझाव दिया था। उन्होंने बताया, उस समय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंगनाथ मिश्रा ने सुझाव को माना और इस परंपरा की शुरुआत हुई।

स्वाद की जिम्मेदारी जज की पत्नी पर

बुधवार को जो न्यायाधीश खाना लाते हैं उसमें उनके ही राज्य के प्रसिद्ध पकवान शामिल रहते हैं। वहीं के मसालों का इस्तेमाल कर पूरी पारंपरिक विधि से खाना पकाया जाता है ताकि खाने में स्थानीय स्वाद बरकरार रहे। स्वाद की पूरी जिम्मेदारी जज की पत्नी निभाती हैं।

बीते बुधवार को जस्टिस अरुण मिश्र के घर में बना मध्यप्रदेश का पारंपरिक पकवान परोसा गया जिसमें भरवां भंडी और बैंगन, मलाई कोफ्ता और पनीर लबाबदार शामिल था। वहीं मीठे में खीर और अन्नास केसर हलवा और मालपुआ रहा। इससे पहले यूपी के रहने वाले जस्टिस आर के अग्रवाल मेजबान रहे। उनके घर से आई कढ़ाही पनीर और दम आलू का स्वाद सबने चखा।

जून 2014 में सेवानिवृत्त हुए जस्टिस एके पटनायक के मुताबिक उस समय मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस अल्तमस कबीर ने कुछ नियम बनाए थे। जैसे मध्याहन भोजन को कभी जजों के बीच प्रतियोगिता के तौर पर न लिया जाए। साथ ही उनके द्वारा निर्धारित किए गए व्यंजनों की संख्या बढ़ाने पर जुर्माना भी तय किया गया था।

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