आज की राजनीति की प्रमाणिकता पर श्री मोहन भागवतजी का सवालिया निशान

By Pradesh Times Sunday, February 12 17 12:00:00

आज की राजनीति की प्रमाणिकता पर श्री मोहन भागवतजी का सवालिया निशान

संत-हिरदाराम-नगर-प्रतिनिधि भोपाल।-राष्ट्रीय-स्वयं-सेवक-संघ-प्रमुख-श्री-मोहन-भागवतजी-ने-आज-की-राजनीति-की-प्रमाणिकता-पर-सवालिया-निशान-लगाते-हुए-कहा-है-कि-राजनीति-सेवा-का-माध्यम-है,-जिसमें-कुछ-पाने-की-चेष्टा-नहीं-करना-चाहिए।-उन्होंने-पार्षद-से-सांसद-तक-मौजूद-जनप्रतिनिधियों-एवं-पार्टी-पदाधिकारियों-को-त्याग,-तपस्या,-विनम्रता-एवं-सादगी-का-पाठ-पढ़ाते-हुए-कहा-कि-इसके-बिना-भारत-विश्व-गुरू-नहीं-बन-सकता।-पंडित-दीनदयाल-उपाध्यायजी-का-उदाहरण-देते-हुए-उन्होंने-कहा-कि-वे-चुनाव-हार-गए,-लेकिन-सिद्धांतों-से-समझौता-नहीं-किया।-कई-उदाहरण-देते-हुए-जिन-नेताओं-पर-स्वार्थ-और-सत्ता-का-लालच-हावी-है,-उन-पर-कटाक्ष-भी-किए।-मंच-पर-andnbsp;मुख्यमंत्री-श्री-शिवराजसिंह-चौहान,-प्रदेश-भाजपा-अध्यक्ष-श्री-नंदकुमार-सिंह-चौहान-की-विशेष-उपस्थिति-में-सत्ता-व-संगठन-के-हर-छोटे-बड़े-पदाधिकारियों-से-खचाखच-भरे-संत-हिरदाराम-आडीटोरियम-में-अपने-अत्यंत-प्रेरक-उद्बोधन-में-श्री-मोहन-भागवतजी-ने-पंडित-दीनदयाल-उपाध्यायजी-के-जीवन-व-विचारधारा-पर-विस्तार-से-रोशनी-डाली-तथा-कहा-कि-वे-एक-व्यक्ति-नहीं-बल्कि-सशक्त-और-सार्थक-विचार-पुंज-थे,-जिन्होंने-एकात्म-मानव-दर्शन-का-विचार-दिया-और-एकात्म-मानव-दर्शन-ही-हमारी-संस्कृति-का-आधार-है।-एकात्म-दृष्टि-ही-समग्र-दृष्टि-है।

त्याग,-सादगी-तथा-विनम्रता-जरूरी सत्ता-और-संगठन-से-जुड़े-तमाम-हस्तियों-से-मुखातिब-होते-हुए-श्री-मोहन-भागवतजी-ने-कहा-कि-राजनीति-में-त्याग,-सादगी-एवं-विनम्रता-जरूरी-है।-पंडित-दीनदयाल-उपाध्यायजी-ने-रंचमात्र-भी-निजस्वार्थ-का-कोई-भी-कार्य-नहीं-किया।-वे-सारा-दोष-पी-गए-और-केवल-गुणों-को-प्रकट-किया।-आपने-कहा-कि-वे-अपने-मामा-के-घर-अभावों-में-पले,-लेकिन-जब-पढ़-लिखकर-कुछ-बन-गए-तब-उन्होंने-अपने-मामा-व-उसके-परिवार-की-दरिद्रता-को-दूर-करने-के-बजाय-साथ-ही-दूसरे-लाखों-दरिद्र-लोगों-की-दरिद्रता-दूर-करने-का-प्रयास-किया।-ऐसा-त्याग-अपने-जीवन-में-लाने-से-ही-हम-स्वस्थ-राजनीति-कर-भारत-को-विश्व-गुरू-बना-सकते-हैं।-श्री-भागवत-का-इशारा-उन-नेताओं-की-तरफ-था,-जो-अभावों-में-जीवन-गुजारते-हैं-और-धन-दौलत-आने-पर-अपने-व-परिवार-का-तो-ध्यान-रखते-हैं,-लेकिन-समाज-के-दरिद्र-लोगों-को-भूल-जाते-हैं। चुनाव-हारे-पर-सिद्धांतों-से-समझौता-नहीं आज-के-दौर-में-नेता-चुनाव-के-वक्त-सभी-प्रकार-के-हथकंडे-अपनाकर-किसी-तरह-से-जीत-हासिल-करते-हैं,-इसके-विपरीत-आरएसएस-प्रमुख-ने-पंडित-दीनदयालजी-का-उदाहरण-देते-हुए-बताया-कि-जब-वे-चुनाव-लड़े,-तब-उनके-समर्थकों-ने-कहा-कि-उस-क्षेत्र-में-सर्वाधिक-पंडितों-के-वोट-हैं,-इसलिए-उनका-चुनाव-जीतना-लगभग-तय-है।-यह-सुनकर-कार्यकर्ताओं-की-बैठक-बुलाई-और-उन्हें-सख्त-निर्देश-दिए-कि-किसी-भी-वोटर-को-यह-पता-न-चले-कि-मैं-पंडित-हूं।-कार्यकर्ताओं-ने-ऐसा-ही-किया-और-अंत-में-दीनदयाल-चुनाव-हार-गए।-कार्यकर्ता-काफी-दुखी-हुए-लेकिन-पंडित-दीनदयालजी-इस-बात-से-खुश-थे,-कि-उन्होंने-अपने-सिद्धांतों-से-समझौता-नहीं-किया।-श्री-मोहन-भागवतजी-का-इशारा-आज-के-नेताओं-की-तरफ-था,-जो-चुनाव-जीतने-के-लिए-जाति,-धर्म-का-सहारा-लेकर-किसी-भी-तरह-चुनाव-जीतना-जानते-हैं। कटआऊट-लगाने-वालों-को-नसीहत जिस-मार्ग-से-श्री-मोहन-भागवतजी-आए,-वहां-संत-हिरदाराम-नगर-के-भाजपा-कार्यकर्ताओं-ने-अपने-नेता-के-जगह-जगह-कटआऊट-लगा-रखे-थे,-शायद-उस-पर-नजर-पड़ी-और-आर-एस-एस-प्रमुख-अपने-भाषण-में-इस-तरह-के-कटआऊट-का-जिक्र-करना-नहीं-भूले-और-कहा-कि-पंडित-दीनदयाल-उपाध्यायजी-के-पास-पूर्ण-समर्पण-और-पूर्ण-प्रमाणिकता-थी,-उन्होंने-अत्यंत-ही-सादगीपूर्ण-जीवन-व्यतीत-किया,-कभी-अपने-कटआऊट-नहीं-लगाए-और-न-ही-लगाने-पड़े। विचारों-पर-राजनीति-हावी-न-हो स्पष्टवादिता,-सिद्धांत,-ध्येय-और-विचारों-की-चर्चा-करते-हुए-श्री-मोहन-भागवतजी-ने-कहा-कि-इन-पर-राजनीति-कभी-हावी-न-होने-दें,-साथ-ही-उन्होंने-राजनीति,-स्वभाव-व-देश-की-दिशा-बदलने-का-भी-आव्हान-किया-और-कहा-कि-विचारों-पर-पक्के-रहे-तथा-अपने-विचारों-पर-ही-राजनीति-को-आगे-बढ़ाने-का-काम-पर-जोर-डालते-हुए-सत्ता-के-लालच-में-वैचारिक-दृढ़ता-को-न-खोने-तथा-पंडित-दीनदयाल-उपाध्यायजी-की-तरह-कानून-एवं-व्यवस्था-का-पालन-करने-की-नसीहत-भी-दी।-श्री-मोहन-भागवतजी-पूंजीवाद-एवं-समाजवाद-पर-बोले-और-कहा-कि-एकात्म-मानवतावाद-का-सिद्धांत-ही-असल-में-भारत-का-मूल-सिद्धांत-है। जगत-के-लिए-समर्पित-थे-पंडित-दीनदयाल-मुख्यमंत्रीandnbsp; पंडित-दीनदयाल-उपाध्यायजी-की-पुण्य-तिथि-के-अवसर-पर-आयोजित-इस-गोष्ठी-में-मुख्यमंत्री-श्री-शिवराजसिंह-चौहान-ने-जहां-कार्ल-माक्र्स-के-सिद्धांत-को-लेनिन-द्वारा-प्रचारित-करने-की-बात-कही-वहीं-पंडित-दीनदयाल-उपाध्यायजी-के-जीवन-को-च्जगत-समर्पितज्-जीवन-बताते-हुए-कहा-कि-वे-एक-व्यक्ति-नहीं-बल्कि-संस्था-और-विचार-थे,-जिसको-आम-जनता-तक-पहुंचाना-हम-सभी-का-दायित्व-है।-उन्हें-महामानव-की-संज्ञा-देते-हुए-श्री-चौहान-ने-कहा-कि-उन्होंने-पश्चिम-के-अंधानुकरण-के-प्रति-चेताया-था-और-जीवन-में-आनंद-तथा-सुख-से-कैसे-जिया-जाए,-उसकी-कला-बताई।-इसके-अलावा-उन्होने-मन,-शरीर,-आत्मा-और-बुद्धि-की-भी-व्यापक-व्याख्या-की।-आपने-पंडित-दीनदयालजी-की-तरह-समाज-के-सुख-का-भी-विचार-करने-का-आव्हान-किया।-नर्मदा-यात्रा-का-उल्लेख-करते-हुए-कहा-कि-हम-प्रकृति-का-दोहन-करें,-शोषण-नहीं,-इसलिए-ही-यह-यात्रा-निकाली-गई-है,-ताकि-पर्यावरण-एवं-नदियों-के-प्रति-जागरूकता-व-संरक्षण-का-भाव-आमजन-में-पैदा-किया-जा-सके। समग्र-चिंतन-किया-उपाध्याय-ने-श्री-नंदकुमार-सिंह-चौहानandnbsp; इस-अवसर-पर-प्रदेश-भाजपा-अध्यक्ष-श्री-नंदकुमार-सिंह-चौहान-ने-कहा-कि-पंडित-दीनदयाल-उपाध्यायजी-ने-समग्र-चिंतन-किया।-उन्होंने-देशवासियों-को-राजनीति-का-अर्थ-समझाते-हुए-समाज-नीति-कैसी-हो,-इसकी-भी-जानकारी-प्रदान-की।-आपने-बताया-कि-प्रदेश-के-सभी-56-जिलों-में-कार्यक्रमों-का-आयोजन-करेंगे,-ताकि-समाज-में-सकारात्मक-बदलाव-लाया-जा-सके।-इस-मौके-पर-आरएसएस-प्रमुख-ने-पंडित-दीनदयालजी-के-जीवन-पर-आधारित-च्दीनदयाल-के-सपनों-का-भारतज्-पुस्तक-का-विमोचन-भी-किया।-सभागार-में-प्रदेश-मंत्रिमण्डल-के-अधिकांश-सदस्य,-संगठन-के-राष्ट्रीय-व-प्रदेश-पदाधिकारी,-सांसद,-विधायक-संघ-से-जुड़े-पदाधिकारियों-के-अलावा-बड़ी-संख्या-में-गणमान्य-लोग-मौजूद-थे।-अंत-में-स्थानीय-विधायक-श्री-रामेश्वर-शर्मा-ने-हार्दिक-आभार-व्यक्त-किया।andnbsp;

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